वायु प्रदूषण पर हिन्दी में निबंध

वायु प्रदूषण पर निबंध | हवा का प्रदूषण | Air Pollution Essay in Hindi 

पूरे ब्रह्मांड मे पृथ्वी ही एक मात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन संभव है। मानव, पेड़-पौधे, जीव-जन्तु, पशु-पक्षी आदि इस खूबसूरत धरती माँ की गोद मे रहते हैं। सभी का जीवन व्यापन करने के लिए इस धरती पर पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन हैं।

जैसे-जैसे मानव ने अपनी सुख-सुविधाओं को बढ़ाया वैसे-वैसे उसने इस हरी-भरी धरती को नुकसान पहुंचाया है और आज वो समय आ गया है की हमे इस धरती को बचाने के लिए कोशिशें तेज करनी होंगी।

हम जिस खतरे की बात कर रहे हैं वो है वायु प्रदूषण – जी हाँ आज पूरी दुनिया के लिए यह वायु प्रदूषण सबसे बड़ा खतरा बन गया है।

क्या है वायु प्रदूषण – What is Air Pollution in Hindi

पृथ्वी पर सम्पूर्ण जीव-शृष्टि के लिए प्राण-वायु है – ऑक्सीज़न जिसके जरिये हम श्वास ले पाते हैं, इसके बिना हम एक पल के लिए भी जीवित नहीं रह सकते। आज इसी ऑक्सीज़न को हवा प्रदूषण ने घेर लिया है और बना दिया है उसे जहरीला।

पूरे वातावरण को जहरीली गैसों और धुएँ से हमने भर दिया है, जिसके कारण हमारे आस-पास की हवा प्रदूषित हो चुकी है। इतनी प्रदूषित हो चुकी है की हवा भी जहर बन चुकी है और यही है जिसे हम वायु प्रदूषण कहते हैं या हवा का प्रदूषण कहते हैं।

हमारे आस-पास के वातावरण की हवा मे जहरीली गैसों का आवरण ही वायु-प्रदूषण है।

वायु प्रदूषण के मुख्य कारण

वायु प्रदूषण फैलाने मे सबसे बड़ा हाथ अगर किसी का है तो वो है मानव। जी हाँ सिर्फ मानवों ने ही इस धरती पर प्रदूषण को जन्म दिया है।

हमने विकास तो किया लेकिन वो विकास अब हम पर भारी पड़ रहा है क्यूंकी विकास जो हो रहा है उसमे प्रकृति को अनदेखा किया गया, अंधा विकास हम करते रहे और पूरी धरती को हमने विनाश की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

वायु प्रदूषण होने के कई कारण हैं और उन सभी कारणों मे मानव भूमिका मुख्य है। वायु प्रदूषण के निम्न कारण हैं:

1. उद्योग-फ़ेक्टरियों का धुआँ

वायु प्रदूषण को फैलाने मे सबसे बड़ा हाथ अगर किसी का है तो वो हैं उद्योग-फ़ेक्टरियों से निकलने वाली जहरीली गैसें। चिमनियों से निकलता हुआ धुआँ आपने देखा ही होगा।

उद्योग-धंधों का विकास जैसे जैसे तेजी से बढ़ रहा है, वैसे वैसे प्रदूषण का स्तर भी बढ़ता जा रहा है। Manufacturing industries और petroleum refineries से बड़ी मात्र मे जहरीली गैसें, केमिकल, कार्बनिक यौगिक आदि हमारे वातावरण मे घुल जाते हैं।

पूरी दुनिया मे इन उद्योग-धंधों का विकास हुआ है और जो भी नुकसान पर्यावरण को हो रहा है उसकी अनदेखी की गयी है।

2. वाहनों का प्रदूषण

एक समय था जब बैलगाड़ी का प्रयोग आवा-जाही के लिए किया जाता था, फिर लोग साइकल का प्रयोग करने लगे। तब तक तो सब ठीक था, लेकिन अब वक़्त बदल गया है और जमाना आ गया है पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों का।

सड़कों पर आपको तरह तरह के वाहनों का अंबार देखने को मिल जाएगा, और देखने को मिलेगा उनसे निकला हुआ विषैला धुआँ।

आज का व्यक्ति बिना कार, बाइक के घर से निकलना नहीं चाहता। हर घर मे कार और बाइक है। वाहनों की जैसे-जैसे संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे हवा मे प्रदूषण भी बढ़ रहा है।

3. खनन-खुदाई काम

खनन का काम जहां होता है वहाँ भी प्रदूषण बढ़ता है, खनन से निकलने वाले छोटे-छोटे कण पूरे वातावरण को प्रदूषित कर देते हैं। कोयला आदि खनीज़ की जहां खुदाई होती है वहाँ यही परिस्ठ्ति उत्पन्न होती है।

इसके साथ-साथ जहां खुदाई का काम या Construction का काम चल रहा हो वहाँ भी मिट्टी, सीमेंट आदि के कण वातावरण मे घुल कर हवा को प्रदूषित करते हैं।

4. कृषि गतिविधियां

कृषि कार्यों मे तरह तरह के कीटनाशकों और उर्वरक का इस्तेमाल किसान करते है ताकि फसल को कोई नुकसान ना हो। लेकिन यह भी एक बड़ा कारण है हवा मे प्रदूषण को फैलाने में।

इसके अलावा खेतों मे जब फसलों को जलाया जाता है इसके कारण भी वातावरण मे धुआँ फैलता है और हवा को प्रदूषित करता है।

5. पटाखों का धुआँ

हवा मे जहर घोलने का काम काफी हद तक पटाखे भी करते हैं। दिवाली हो या नया वर्ष या फिर हो शादी, पटाखे के बिना सब अधूरा है। लेकिन इसका विपरीत परिणाम भी सामने आ रहा है वो है हवा प्रदूषण।

6. घर के अंदर का वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण के कारण यही खतम नहीं होते। हम अपनी रोजिंदा ज़िंदगी मे ऐसी बहुत सी चीजों का इस्तेमाल करते हैं जिनकी वजह से कहीं ना कहीं हमारी हवा दूषित हो रही है लेकिन हम उन सब चीजों से अंजान हैं।

घरेलू सफाई उत्पादों, डिओडोरेंट, डिटर्जेंट, शेम्पू, बीड़ी-सिगरेट आदि भी आपके घर के अंदर की हवा को अशुद्ध करते हैं।

वायु प्रदूषण से होने वाले नुकसान

सड़क पर चलते समय वाहनों के धुएँ का सामना तो आपने किया ही होगा। आप खुद ही सोचिए कितनी घुटन होती है जब आपके अंदर वो जहरीला धुआँ जाता है।

वायु प्रदूषण मानव जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा तो है ही, साथ ही साथ पूरी धरती के अन्य जीवों के लिए भी खतरा बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में इसके घातक परिणाम देखने को मिलेंगे।

वायु प्रदूषण से मानव शरीर पर असर

हवा प्रदूषण का सबसे बुरा असर अगर किसी पर पड़ रहा है तो वो है हमारा शरीर।

अस्थमा की बीमारी-फेफड़ों को नुकसान: जहरीली हवा श्वास मे लेने से हमारे फेफड़े धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं। अस्थमा के मरीजों के लिए तो हवा का प्रदूषण जान लेवा है। जहरीली हवा को अंदर लेना मतलब सेकड़ों सिगरेट एक साथ पीने के बराबर है।

हृदय रोग: प्रदूषित हवा से हमारा हृदय भी प्रभावित होता है। कई बीमारियाँ जो की हृदय से संबंध रखतीं हैं उनके लिए हवा मे फैला जहर जान लेवा साबित होता है।

प्रतिकूल गर्भावस्था  (जैसे प्रीटरम जन्म): जो महिला गर्भ से हैं उनके लिए और बच्चे के लिए हवा का प्रदूषण बेहद हानिकारक है।

त्वचा पर असर: प्रदूषित हवा मे फैली जहरीली गैसें हमारी त्वचा पर भी बुरा प्रभाव डालती हैं।  हमें त्वचा संबंधी समस्या का सामना करना पड़ता है।

हमारे शरीर को अगर शुद्ध हवा ना मिले तो पूरे शरीर पर इसका विपरीत असर देखने को मिलता है।

पर्यावरण पर दुष्प्रभाव

हमारे पर्यावरण, हमारी पृथ्वी पर हवा के प्रदूषण का बहुत बड़ा दुष्प्रभाव पड़ा है और अब नोबत ये आ गयी है की विश्व के सभी देशों को इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

ग्लोबल वार्मिंग: कम वर्षा होना, बिन मौसम वर्षा, समुद्र का बढ़ता स्तर, अधिक तापमान- ये सब ग्लोबल वार्मिंग का ही परिणाम है और ये सब हो रहा है Air Pollution से।

ओज़ोन का घटता आवरण : सूर्य की अल्ट्रा-वोइलेट किरणों से हमारी रक्षा करता है पृथ्वी के चारो तरफ फैले ओज़ोन गैस का आवरण। लेकिन हवा के प्रदूषण की वजह से आज ओज़ोन के ये आवरण धीरे-धीरे खतम होता जा रहा है।

वन्य जीवों पर असर: हमारी गलतियों का परिणाम अन्य वन्य जीवों और पशु-पक्षियों को देखना पड़ रहा है। आज उनके आस्तिव पर एक बड़ा सवाल पैदा हो गया है।

हवा प्रदूषण रोकने के उपाय

ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका कोई हल ना हो। अगर हम आज भी सचेत हो जाएँ तो इस वायु प्रदूषण से हम लड़ सकते हैं और अपनी धरती को इसके दुष्परिणाम से बचा सकते हैं।

हवा प्रदूषण को रोकने के उपाय निम्न हैं:

अधिक से अधिक वृक्ष उगाएँ

हवा को शुद्ध करने मे पेड़-पौधों को अहम योगदान होता है। जितने ज्यादा वृक्ष होंगे, हवा उतनी साफ होगी। इसलिए हमें ज्यादा से ज्यादा वृक्ष उगाने चाहिए।

वृक्षों की कटाई पर भी रोक लगाने की जरूरत है, जंगलों को जिस तरह से काटा जा रहा है उसके खिलाफ कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

प्राकृतिक ऊर्जा के स्त्रोत का उपयोग

सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा आदि प्राकृतिक ऊर्जा स्त्रोत का इस्तेमाल करना चाहिए और जैविक ईंधनों का उपयोग कम से कम हो ये प्रयास होना चाहिए।

सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा से बिजली का उत्पादन हो रहा है, सौर संचालित ट्रेन भी चल रहीं हैं। बस इसी तरह से हमे और ज्यादा से ज्यादा इनका इस्तेमाल करना होगा।

वाहनों मे Eco Friendly ईंधन का इस्तेमाल

पेट्रोल और डीजल की जगह अगर सड़क पर इलैक्ट्रिक और CNG से चलने वाले वाहन आ जाएँ तो इस से भी वाहनो से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।

साथ ही साथ सड़क पर Public ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए, ताकि वाहनो की संख्या सड़कों पर कम हो।

जहरीली गैस फैलाने वाले उद्योग पर प्रतिबंध

बहुत सी ऐसी फेक्टरियाँ और उद्योग हैं जो की नियमों की धज्जियां उड़ाकर बिना किसी रोक-टोक के हवा मे प्रदूषण फैला रहे हैं। ऐसे उद्योग-कारखानों पर कड़ी कार्यवाही करने की जरूरत है।

जन जागृति

जन जागृति होना सबसे महत्वपूर्ण है। लोगों को ये पता होना चाहिए की अगर हम हवा मे जहर घोलने का काम कर रहे हैं तो ये जहर हमें ही पीना है। जब तक लोगों को समझ मे नहीं आएगा की हवा प्रदूषण किस हद तक बढ़ गया है तब तक इस हवा के प्रदूषण को रोक पाना संभव नहीं।

तरह – तरह के जन जागृति अभियान चलाकर लोगों मे जागृति लाने की जरूरत है, ताकि उनके विचारों में परिवर्तन लाया जा सके।

अंतिम शब्द

धरती हम सबकी है और इसकी देखभाल करना किसी एक की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि इस धरती पर रहने वाले हर इंसान की ज़िम्मेदारी है। अपनी आने वाली पीढ़ी को अगर हम साफ-शुद्ध वातावरण देना चाहते हैं तो हमें अभी से इस वायु प्रदूषण के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ना होगा, तभी हम और हमारी आने वाली पीढ़ी चैन की सांस ले पाएंगे।

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